कैसे बया करु मै अपनी ये चाहत
महसुस कर कभी,
मेरे दिल की धडकन
तेरे बिना दिल को एक पल भी नही राहत
तुझे दिन रात सपनों मे देखु, है ये मेरी फितरत
देखना मेरी आँखो मे कभी,
खुद की तसवीर
पर तु है के तुझे मेरी तरफ देखने की भी नही फुरसत
तेरी खुशी की ही मैने मांगी हमेशा मन्नत
झांकना मेरी रुह में कभी,
शायद तब पता चले
साथ होने से तेरे दुनिया बन गयी थी मेरी जन्नत
एक पल मे तुने बदल दी अपनी सुरत
फिर भी,
तु जान ले के
ये मीरा समझकर तुझे शाम, पुजती रहेगी तेरी मुरत..!